12 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार कौन


  • कहते हैं कि किसी देश का भविष्य उस देश के युवाओं पर निर्भर करता है परंतु जिस उम्र में देश के युवाओं के हाथ में कलम या डिग्री होनी चाहिए उस उम्र में हमारे देश के युवा पत्थर लेकर सड़कों पर आंदोलन करते दिख रहे हैं । क्या इस तरह देश का भविष्य खतरे में नहीं है आज यह भारत देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ा सवाल है । 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने हरिजन एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी न होने का आदेश दिया। जिसके बाद देश के कई बड़े इलाकों में दलित वर्ग के लोगों ने भारत बंद आंदोलन शुरु कर दिया। यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश के कई इलाकों में फैल गया और कब इस आंदोलन  ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया पता ही नहीं चला। इस हिंसक आंदोलन के कारण 12 निर्दोषों को अपनी जान गवानी पड़ी।वहीं दूसरी ओर सभी राजनीतिक पार्टियां इस हिंसक आंदोलन में अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का कहना है कि मैं इस आंदोलन में दलित भाइयों का पूर्ण समर्थन करती हूं, जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी को दलित विरोधी बताया।सबसे बड़ा सवाल यह है कि कब तक हमारे देश में जातिवाद के नाम पर राजनीति की जाएगी तथा ऐसे हिंसक आंदोलन होंगे सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए ।
                                                    पुनीत त्रिपाठी

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