21वी सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण

27 जुलाई को 21वीं सदी का सबसे लंबा #चंद्रगहण, जानें उस दिन क्या न करें ?
#Published by : Ashutosh Tripathi
27 जुलाई की रात 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण होगा। इस बार का चंद्रग्रहण इसलिए और खास है क्योंकि इस दिन गुरु पूर्णिमा भी है। इस चंद्रग्रहण को देश के सभी हिस्सों से देखा जा सकेगा। भारत के अलावा ये चंद्रग्रहण ऑस्ट्रेलिया,एशियाई देश और रूस में भी दिखेगा।

27 जुलाई 2018 का चंद्रग्रहण भी 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण रहने वाला है। इसकी कुल अवधि 6 घंटा 14 मिनट रहेगी। इसमें पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति 103 मिनट तक रहेगी। भारत में यह लगभग रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से शुरू हो कर लगभग 3 बजकर 54 मिनट पर पूर्ण होगा। इस चन्द्र ग्रहण में सुपर ब्लड ब्लू मून का नजारा भी दिखेगा। चंद्र ग्रहण के समय चांद ज्यादा चमकीला और बड़ा नजर आएगा इसमें पृथ्वी के मध्यक्षेत्र की छाया चंद्रमा पर पड़ेगी।

कब होता है चंद्रग्रहण

सूर्य और चंद्रमा के बीच जब पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाती है तो यह ज्यामितीय स्थिति चन्द्रग्रहण कहलाती है। अतएव चंद्रग्रहण सिर्फ पूर्णिमा को ही घटित हो सकता है। ग्रहण का प्रकार एवं अवधि सूर्य और धरती के मध्य चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर होता है। ग्रहण का शाब्दिक अर्थ है, ग्राह्य, अंगीकार, स्वीकार, धारण या प्राप्त करना। लिहाजा आध्यात्मिक मान्यताएं ग्रहण काल में ब्रह्माण्डीय ऊर्जा को अंगीकार करने के लिए जप, तप, उपासना, साधना, ध्यान और भजन का निर्देश देती हैं।

बरतें ये सावधानियां

यह पूर्ण चंद्रग्रहण 104 साल बाद लग रहा है। इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। ग्रहण काल में न तो भोजन पकाना चाहिए और ना ही उसका सेवन करना चाहिए। जो चीज चंद्रमा के एक पूर्ण चक्र के दौरान 28 दिनों में होती है, वह चंद्रग्रहण के दौरान दो से तीन घंटे में पूरी हो जाती है।

चंद्र गहण के दौरान भोजन करने से आपकी एनर्जी लगभग 28 दिन बाद की अवस्था में चली जाती है। चंद्र ग्रहण के दौरान वायुमंडल में बैक्टीरिया और संक्रमण का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में भोजन करने से संक्रमण अधिक होने की आशंका रहती है। इसलिए ग्रहण के दौरान भोजन खाने से बचना चाहिए।

इस काल में कच्ची सब्जियां और फल पूरी तरह से खाए जा सकते हैं क्योंकि उनमें किसी प्रकार के कोई बदलाव देखने को नहीं मिलते। लेकिन बैक्टीरिया और संक्रमण से पका हुआ भोजन सड़ने लगता है।

ग्रहण के पश्‍चात ऐसा होना चाहिए दान

ग्रहण के पश्चात दान की परंपरा है। आटा, गेहूँ, गुड़, वस्त्र, रसीले फल आदि दान देने के लिए उत्तम माने गए हैं। संपत्ति विवाद से मुक्ति के लिए तिल के मिष्ठान, मान-सम्मान के लिए सूखी मिठाइयां, तात्कालिक आर्थिक कष्ट को दूर करने के लिए रस वाले मीठे पदार्थ, रोग से मुक्ति के लिए घी से भरे चांदी के टुकड़े युक्त कांसे के कटोरे में अपनी छाया देखकर दान, संकट से मुक्ति के लिए ग्रहण के बाद की सुबह को चींटियों और मछलियों को भोजन अर्पित करने से शुभ और आशाजनक परिणाम प्राप्त होता हैं, ऐसा पारंपरिक अवधारणाएं कहती हैं।

हिंदू धर्म के अनुसार क्या है चंद्र ग्रहण का राज?

चंद्र ग्रहण के पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार असुर और देवताओं के बीच लड़ाई हो रही थी। देवता और राक्षस दोनों ही अमरता का वरदान प्राप्त करना चाहते थे और अमृत को प्राप्त करना चाहते थे। तभी विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण करके राहु को मोहित कर लिया और उससे अमृत हासिल कर लिया। राहु ने भी अमृत पाने के लिए देवताओं की चाल चलने की सोची। उसने देवता का भेष धारण किया और अमृत बंटने की पंक्ति में अपनी बारी का इंतजार करने लगा। लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया। विष्णु भगवान ने राहु का सिर काट दिया और वह दो ग्रहों में विभक्त हो गया- राहु और केतु। सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए राहु ने दोनों पर अपना छाया छोड़ दी जिसे हम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के नाम से जानते हैं। इसीलिए ग्रहण काल को अशुभ और नकारात्मक शक्तियों के प्रभावी होने का समय माना जाता है।

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